मुझे दे रहें हैं तसल्लियाँ वो हर एक ताज़ा – जिगर मुरादाबादी शायरी

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जिगर मुरादाबादी 20 वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध उर्दू कवि और उर्दू गजल के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक हैं. उनकी एक ग़ज़ल पढ़िए – “मुझे दे रहें हैं तसल्लियाँ वो हर एक ताज़ा” .

मुझे दे रहे हैं तसल्लियाँ वो हर एक ताज़ा पयाम से

कभी आके मंज़र-ए-आम पर कभी हट के मंज़र-ए-आम से

न गरज़ किसी से न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से

तेरे ज़िक्र से, तेरी फ़िक्र से, तेरी याद से, तेरे नाम से

मेरे साक़िया, मेरे साक़िया, तुझे मरहबा, तुझे मरहबा

तू पिलाये जा, तू पिलाये जा, इसी चश्म-ए-जाम ब जाम से

तेरी सुबह-ओ-ऐश है क्या बला, तुझे अए फ़लक जो हो हौसला

कभी करले आके मुक़ाबिला, ग़म-ए-हिज्र-ए-यार की शाम से

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